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Satish 27 Dec, 2018 06:54 72437 26

केवल भारत ही नहीं दुनिया भर के लोग हैं अंधविश्वासी 

ये सारी मान्यताएं और परंपरायें नए साल की हैं।

परंपरायें बनती हैं, टूटती हैं और फिर नई परंपरा बनती है। ये एक लगातार चलने वाला सिलसिला है। हालाँकि कई ऐसी परंपरायें भी हैं जो सदियों से चली आ रही हैं और न जाने कितने वर्षों तक आगे चलती रहेंगी। इन परंपराओं या मान्यताओं के पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं होते। इनका कोई तार्किक आधार नहीं होता। इसलिए इन परंपराओं को मानने वालों के अलावा दूसरों के लिए इनका कोई महत्व नहीं।

हर देश में वहाँ की संस्कृति के अनुरूप कोई न कोई परंपरा होती है। ये परंपरायें या तो रहन-सहन से जुड़ी होती हैं, पूजा-पाठ से, धर्म-आस्था से या किसी विशेष रूप में किसी खास दिन से जुड़ी हुई होती हैं। ऐसी परंपराओं के पीछे मान्यताओं का आधार होता है। जिसका कोई वैज्ञानिक विश्लेषण संभव नहीं। आज हम आपको कुछ ऐसी ही मान्यताओं/परंपराओं के बारे में बतायेंगे जो नये साल से जुड़ी हुयी हैं। इसमें अलग-अलग देशों में प्रचलित मान्यताओं के बारे में हम बात करेंगे।

तो आइए आप और हम चलते हैं, तर्क और विज्ञान के चप्पल-जूते उतार कर मान्यताओं की टेढ़ी-मेढ़ी सड़कों को पार करने की कोशिश करते हैं।