Life
Vishal Dubey29 Nov, 2018

पुस्तक समीक्षा : हम कौन हैं, कहां से आए हैं जैसे सवालों का जवाब है 'बेचैन बन्दर'

ब्रह्माण्ड के अनोखे रहस्यों और मनुष्य की उत्पत्ति के राज खोलती विजयराज शर्मा की किताब।

मैं कौन हूं? कहाँ से आया हूं? मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है? ऐसे सवाल हर जिज्ञासु मन में उठना जायज है। मैं खुद की बात करूं तो रात के अंधेरे में अक्सर तारों को निहारता हूं और सोचता हूं कि नजदीक से इतनी विशालकाय लगने वाली इस धरती का अस्तित्व करोड़ों मील ऊपर से तो कुछ भी नहीं होगा। लगता है की जिस दुनियादारी की पेंच में हम कस दिए गए हैं उसी को सबकुछ मानकर बैठ गए हैं। कुंए के मेंढ़क टाइप। अगर आप भी जीवन की आपाधापी में मुग्ध हैं तो मैं ये दावे के साथ नहीं कह सकता कि आपके दिमाग में ऐसे सवाल आए होंगे।

खैर विज्ञान की महानता को मैं हमेशा से स्वीकारता आया हूं पर इसके गहन अध्ययन में कभी रूचि नहीं दिखा पाया। इसकी एक ख़ास वजह है बोलचाल की भाषा में इन छोटे-छोटे सवालों के जवाबों का दस्तावेज मौजूद ना होना। फेसबुक के माध्यम से जब मैं विजय सिंह ठकुराय 'झकझकिया' (विजयराज शर्मा ) से जुड़ा तो मेरे भीतर बैठे तमाम सवालों को और मेरी जिज्ञासाओं को जैसे इंधन मिल गया। ऐसा अक्सर कई साइंस फिक्शन फिल्मों को देखकर भी हुआ करता था। लेकिन इस बार भाषा थी हिंदी और सवालों के जवाब कतई सटीकऔर सपाट । मैं विजय को पढ़ता था, वो अक्सर विज्ञान के कई पहलुओं पर छोटे-छोटे पोस्ट अपने टाइमलाइन पर लिख कर टांग दिया करते थे। आगे चलकर पता चला कि उनकी एक किताब आने वाली है 'बेचैन बन्दर'। मेरी उत्सुकता और बढ़ी और मैंने किताब मांगा ली। किताब में क्या है? किन सवालों के जावब धरे हैं? आइए जानते हैं।