क्या है 'H -1B वीजा बिल', इसका क्या असर हो सकता है भारतीय आईटी कंपनियों पर?

ट्रम्प ला रहे हैं नया बिल। 

डोनाल्ड ट्रम्प को अभी अमेरिका का राष्ट्रपति बने 1 महीना भी नहीं हुआ है, और उनके फैसलों ने अभी से दुनियाभर में तहलका मचाना शुरू कर दिया है। पहले 7 मुस्लिम देशों के अप्रवासियों की देश में एंट्री पर रोक लगाने के बाद अब 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव' में नया 'H -1B वीजा' बिल प्रपोज़ किया गया है।  

इस बिल में H -1B  वीजा से जुड़े नियमों को कड़ा करने को लेकर कई प्रावधान किए गए हैं। यह बिल अमेरिकी संसद में पास होगा या नहीं, यह तो वक़्त ही बताएगा। लेकिन इस बिल के प्रस्तावित प्रावधानों ने अमेरिकी ही नहीं भारतीय आईटी कंपनियों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

H -1B वीसा एक रोजगार आधारित अप्रवासी वीजा होता है। यह वीजा उन विदेशों नागरिकों को दिया जाता है, जिन्हें अमेरिकी कंपनियां विज्ञान, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग जैसे स्पेशलाइज्ड फील्ड्स में जॉब ऑफर करती है।  ये विदेशी कर्मचारी यहाँ अस्थाई रूप से निवास करते हैं। 

H -1B  वीजाधारक अमेरिका में प्रारंभिक तौर पर 3 साल तक रह सकते हैं। इस अवधि को बढ़ाकर 6 साल भी किया जा सकता है।

H -1B वीजा के इस प्रस्तावित बिल में कुछ प्रमुख बदलाव किए गए हैं, जो अमेरिका में स्थापित भारतीय कंपनियों और भारतीयों को प्रभावित करेंगे।  

आइये जानते हैं प्रस्तावित 'H -1B वीजा' के प्रमुख प्रावधानों के बारे में।