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Vishal Dubey 13 Feb, 2019 08:51 73342 8

इत्र लगाकर इतराने वालों इसका इतिहास जानते हो?

इस्लाम के साथ-साथ इत्र भी भारत आया था।

इत्र नाम लेने भर से ही आसपास खुशबू महसूस होने लगती है। जब से इसे बनाने की प्रक्रिया का ईजाद हुआ है तब से लेकर आज तक इत्र के हजारों रूप देखने को मिले हैं। अब आलम ये है कि इसी खुशबू ने डियोड्रेंट का रूप ले लिया है। पहले प्राकृतिक फूलों के तेल से तैयार किया जाने वाला इत्र आज शीशी-बोतलों में एल्कोहल के रूप में भरकर बेचा जा रहा है। इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर घर के कपड़ों, पर्दों, गाड़ियों और फर्नीचर तक पर किया जा रहा है। क्या आपने प्रयोग से पहले इसके इतिहास को खंगालने की कोशिश की थी? 

अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी इत्र की कहानी सुनाने वाले हैं। आपको इस स्टोरी में इत्र के आविष्कार से इसके व्यापार तक की पूरी कहानी बताई जाएगी। साथ ही यह भी बताया जायेगा कि मिस्र से फारस और रोमन साम्राज्य होते हुए भारत में इसका विकास कैसे और कब हुआ। साथ ही फ्रांस का इस व्यापार पर एकछत्र राज कैसे स्थापित हुआ इसकी भी पड़ताल करेंगे।