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Satish 30 Jan, 2019 08:17 73071 8

पहली भारतीय महिला जिसने गणतंत्र दिवस की परेड में पुरुषों के दल का नेतृत्व किया 

भावना कस्तूरी ने रच दिया इतिहास।

कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा, ये जिंदगी है कौम की तू कौम पे लुटाये जा...

इस गीत को सुन कर रगों में खून उबाल बनकर दौड़ने लगता है। सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। देशभक्ति का जुनून सर चढ़ के बोलने लगता है। कई और गीत जेहन में आने लगते हैं, होठ गुनगुनाने लगता है - 'आओ बच्चों तुम्हें दिखायें झाँकी हिंदुस्तान की, इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की, वंदे मातरम, वंदे मातरम...'
भारतवर्ष में जवानों और सिपाहियों को जिस सम्मान से देखा जाता है, वो काबिल-ए-गौर है। हमारे यहाँ देश पर अपनी जान न्योछावर कर देने वाले अमर शहीदों की कोई कमी नहीं रही है। फौज में अपने बच्चों को भेजना देश सेवा समझा जाता है। कई परिवारों की दस-दस पीढ़ियाँ सेना में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें मिसाल मानकर लोग उनसे प्रेरणा लेते हैं और खुद को भी देश सेवा में समर्पित कर देते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सेना में महिलाओं की भागीदारी ने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। इसी कड़ी में एक नाम और जुड़ा है। वो नाम है भावना कस्तूरी का। इन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसकी वजह से इनका नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। तो चलिये, जानते हैं भारत की इस बहादुर बेटी की गौरवपूर्ण गाथा।