70 साल की हैं जनक दीदी मगर उत्साह आज के युवाओं पर भारी है, आप खुद पढ़िए उनकी कहानी

प्राकृतिक संसाधनों को सहजने के लिए कर रही हैं काम। 

'वो साल 1964 था और मैंने चंडीगढ़ में अपना हाई स्कूल ही पास किया था। एक दिन मैं अचानक से बेहोश हो गई। मेरे पेरेंट्स मुझे शहर के पीजीआई हॉस्पिटल ले गए। डॉक्टर ने उन्हें कहा कि उन्होंने मुझे ले जाने में देर कर दी। मुझे दिल की कोई गंभीर बीमारी है और मेरी ओपन हार्ट सर्जरी होगी। उन्होंने मुझे एक साल तक वहां भर्ती करके रखा गया और मैंने नौ महीनों तक लोगों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा।

मैं रोज डॉक्टर से पूछती थी कि मेरी सर्जरी कब होगी, क्योंकि मुझे लगता था कि मैं सर्जरी के दौरान मर जाऊंगी। लेकिन वो मेरी पहली सफल ओपन हार्ट सर्जरी थी। सर्जरी के बाद डॉक्टर मेरे पास आए और मुझे कहा,"जनक तुमने इतिहास लिख दिया है। वो अपनी बात पूरी करते इससे पहले मैंने भगवान से कहा,"आपने मुझे नई जिंदगी दी है और मैं इसे आभार जताने में बिताऊंगी।'

यह कहानी है कि 70 साल की समाज सेविका जनक पलटा मगिलिगन की। वे अपने सफर की कहानी का आगाज़ कुछ ऐसे ही करती हैं। जनक दीदी बीते कुछ दशकों से प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने के साथ-साथ उन्हें बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी प्रकृति के अनेक पहलुओं का अनुभव ले सके।  

आइए उनके बारे में जानते हैं करीब से।