शिल्प के जादूगर और उनकी सबसे कलात्मक रचना के बीच हुआ था मनमुटाव, जानिए पूरी दास्तां 

बॉलीवुड का नायाब नगीना!

बॉलीवुड में अच्छे लेखकों की कमी रही है, ये बात जगजाहिर है। चुनिंदा लेखकों के बलबूते ही बॉलीवुड अपनी नैया पार लगाती रही है। मगर इसके बावजूद, जितने भी अच्छे लेखक हुए हैं, उन्होंने अपनी काबिलियत का परिचय अपने काम से दिया है। उन्हीं चुनिंदा लेखकों में शामिल एक नाम है, जनाब जावेद अख्तर का। शब्दों का ऐसा जादूगर, जिसने अपनी लेखनी से बॉलीवुड को कई नायाब गीत, फिल्में और संवाद दिए हैं।
जावेद अख्तर मूलतः रूमानियत के कलेवर में ढले हुए लेखक हैं जो प्रकृति की मनोरम छटाओं का खूबसूरती से प्रयोग करते हैं। वैसे बॉलीवुड से अलग इनके नज्मों को पढ़कर इनकी विविधतायें भी देखने को मिलती है। एक रूमानी कवि को प्रेम न हो तो ये तो वही बात हो गई, भोज में पत्तल भी लिया, पूरी-सब्जी भी रखवाई मगर खाया कुछ नहीं। तो जावेद साहब कोई अपवाद नहीं। उन्हें भी प्रेम हुआ और एक बार नहीं दो बार हुआ। दूसरी प्रेम कहानी का अंजाम तो सुखद रहा मगर उसका सफर काँटों भरा था। तो आइये आज उन्हीं कँटीली राह को आईने में देखने की कोशिश करते हैं। देखते हैं क्या कुछ हमें दिखता है।