आखिर क्यों होते हैं सेना के जवान अवसाद के शिकार? जरूरत है इस तरफ ध्यान देने की 

पिछले कुछ समय में हुआ है इन मामलों में इज़ाफ़ा। 

कल ही ख़बर पढ़ी कि सीआईएसएफ के एक जवान ने आवेश में आकर 4 अन्य जवानों की हत्या कर दी। इस घटना से कुछ दिन पूर्व ही बीएसएफ के एक जवान ने मिलने वाले घाटिया खाने को लेकर अपनी व्यथा व्यक्त की थी। ये तो पिछले कुछ दिनों की ही घटनाये हैं। लेकिन भारतीय सेना का इतिहास इस तरह की दुःखद घटनाओं से भरा पड़ा है। देश के जवानों के बीच असंतोष की भावना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सैनिकों में बढ़ते इस असंतोष की वजह से ही आत्महत्या और हत्या की घटनाएं बढ़ती हुई दिखती हैं।  

सैनिक भी आम इंसान हैं, और उन्हें भी तनाव या अवसाद हो सकता है। साथ ही उनके क्षेत्र में यूँ भी तनाव की स्थितियां बनी रहती हैं। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि सेना के इन जवानों की समय-समय पर काउंसलिंग भी जाती है। इसके बाद भी अधिकारियों की हत्या करना या खुद की जान ले लेने जैसी घटनाएं होना चिंता का विषय है।

सैनिकों में होने वाले अवसाद पर कई अध्ययन भी किये गए हैं। इन अध्ययनों में इन जवानों को तनाव होने के कुछ मुख्य कारण सामने आये हैं। IDSA में शोधकर्ता रह चुके 'के.सी. दिक्षित' ने भी इस विषय पर शोध पत्र जारी किया था। इसी शोध पत्र और कुछ अन्य अध्ययनों के आधार पर हम सैनिकों में होने वाले तनाव के मुख्य कारणों को समझ सकते हैं।