उल्टी गिनती शुरू, जीवन की संभावनाएं तलाशने मंगल पर उतरेगा NASA का प्रोब

सात महीने पहले धरती से मंगल के लिए हुआ था रवाना।

अगर आप अप्रत्यक्ष रूप से देखेंगे तो मनुष्य की जिज्ञासा ने ही उसकी आवश्यकताओं को बढ़ाया है। जब आवश्यकताएं बढ़ने लगीं तो इंसान को जिज्ञासा से प्राप्त ज्ञान ने प्रयोगों की ओर धकेला। उसने आविष्कार करने शुरू किए। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि आदिमानव अपनी गुफाओं को नदी के किनारे ही बनाते थे ताकि जल स्रोत से वे ज्यादा दूर ना रहें। जब-जब उन्हें प्यास लगती, वे नदी तक जाते और जानवरों सरीखे पानी पीकर वापस आ जाते थे। कुछ ही दिनों में उनमें जिज्ञासा पैदा हुई कि क्या हथेली पर रुकने वाला जल किसी और वस्तु पर रोका जा सकता है? अगर ऐसा हो गया तो वो किसी ऐसी ही वस्तु में जल का संचय कर सकेगा, जिससे उसे हर बार नदी तक जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। पहले तो बड़े पत्तों और जानवर के चमड़ों के माध्यम से जल संचय किया गया और बाद में इसी जिज्ञासा ने मिट्टी के बर्तन, धातु और प्लास्टिक तक का सफर तय करवाया।

ऐसी ही एक जिज्ञासा मनुष्य के भीतर बहुत पहले से मौजूद है, वो ये कि धरती के अलावा जीवन कहाँ संभव है। कई संस्थाओं ने मंगल ग्रह पर जीवन होने की संभावनाएं भी जताई हैं। इसी क्रम में NASA अपने एक मिशन के तहत मंगल पर मानव रहित खोजी यंत्र (प्रोब) उतारने को तैयार है, जिसकी मदद से आगे शोध के लिए ढेरों जानकारियां मिलेंगी। आइए जानते हैं इस पूरे मिशन का क्या मकसद है।