Life
Vishal Dubey04 Dec, 2018

तस्वीरें देखकर बोल उठेंगे की 'बच्चे पालना कोई बच्चों का खेल नहीं'

शरारतों के बिना बचपन गुजर जाए, ऐसा कभी हो नहीं सकता।

सुदर्शन फ़ाकिर की लिखी हुई कुछ बातें याद आ रही हैं- 'ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो / भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी // मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन / वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी। ये पढ़कर आपको भी अपना बचपन याद आ जाता होगा। जीवन भर अपना मन इसी चाह में लगा होता है कि एक बार दोबारा से बचपन को जीने का मौका मिल जाए। इसकी ख़ास वजह है उस दौर की आजादी। जिम्मेदारियों से परे का जीवन। ना पैसे कमाने की चिंता ना ही पढ़ाई की चिंता। ना सोने-उठने का कोई वक़्त न ही खेलने-कूदने का। क्या आपने कभी सोचा है कि बचपन को हम सुनहरे पलों में किसकी वजह से गिन पाते हैं। 
जवाब है माता-पिता या जिसने भी आपका पालन-पोषण किया था। जी हाँ, हमारी इतनी आजादी के लिए कुछ लोगों को बहुत सारी जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ता है। बच्चों को पालना आसान काम नहीं है। इसके पीछे एक प्लानिंग और समर्पण का होना भी बहुत जरूरी है। आइए देखते हैं पेरेंटिंग के बीच घर वालों को बच्चों की किन आदतों और हरकतों से होकर गुजरना पड़ता है।