न्यूज़ Digest
Vishal Dubey 22 Jan, 2019 13:23 72868 35

आई हैं कुम्भ से तस्वीरें... यूं बहार बन के

पहुँच नहीं पाए तो तस्वीरों से देख लो प्रयागराज का रंग।

देखो, पौराणिक कथाओं के अनुसार जब दैत्यों और देवों ने मिलकर समुद्र मंथन से अमृत निकाला, तो देवताओं ने चीटिंग कर ली। इंद्र के पुत्र जयंत अमृत चुराकर उड़ गए। दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने चेलों को आदेश दिया की वो जयंत को मारकर अमृत ले आयें। फिर क्या, देवताओं और दानवों में युद्ध छिड़ा जो बारह दिन तक चला। खींचा-तानी में घड़े से अमृत की बूंदें नीचे भी गिर गईं। ये बूंदें गिरीं हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज (इलाहाबाद) में जहां कुम्भ लगता है।

वहीं खगोलीय गणनाओं से समझें तो मकर संक्रांति के दिन नहाने और दान-पुण्य करने का कार्यक्रम शुरू होता है। जिसकी वजह है कि सूर्य और चन्द्रमा, वृश्चिक राशि में और बृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करते हैं। कहते हैं कि कुम्भ में स्नान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और सारे पाप धुल जाते हैं।

आपको बता दें कि प्रयाग को छोड़कर अन्य तीन स्थानों पर कुम्भ 12 साल में लगता है। वहीं प्रयाग में अर्धकुम्भ के दो पर्व होते हैं। जिसकी वजह से 6 साल में एक बार अर्ध कुम्भ का आयोजन होता है। 2019 यानि इस वर्ष अर्धकुम्भ प्रयागराज में शुरू हो गया है। न केवल भारत से बल्कि विदेशों से लोग गंगा में डुबकी लगाने और पाप धुलने आ रहे हैं। अगर आपका पहुंचना नहीं हो पाया है तो चिंता न करें हम आपके लिए प्रयागराज से तस्वीरें ले आए हैं। उन्हें देखिए और बिना इलाहाबाद पहुंचे कुम्भ का आनंद लीजिए।