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Satish 31 Jan, 2019 07:01 73086 11

गाँधी ही नहीं उनके विचारों को भी मिले सम्मान तभी गाँधी के होने का मकसद फलित हो पाएगा

गाँधी को नहीं जानने वाले उनको गलत बोलते हैं।

गाँधी महज एक इंसान नहीं एक विचार है। एक ऐसा विचार जिसके सामने आने से उसका हर विरोधी घबराता है इसलिए पीछे से उसकी धोती खींचने की कोशिश में लगा रहता है। ये वैसे लोग होते हैं, जो इस विचार के समकक्ष कोई बेहतरीन विचार रखने की काबलियत नहीं रखते इसलिए चरित्र हनन करने के हथकंडे आजमाने से भी बाज नहीं आते।
गाँधी के आदर्शों के मापदंड ऐसे हैं, जिसके लिए सांसारिक मोह त्यागने की आवश्यकता पड़ेगी, जिसकी बलि आज के समय में कोई नहीं देना चाहता। आज के भौतिकवादी युग में गाँधी के विचार ही नहीं बल्कि खुद वे भी ऑउटडेटेड प्रतीत होते हैं! बहुल भारतीय जनमानस की चेतना वैसी नहीं विकसित हुई जो उनके विचारों को अंगीकृत करें। ऐसे में पहली और अनिवार्य शर्त ये है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव किये जाएं ताकि कुपढ़ों का समुचित विकास हो और वे अपनी चेतना और विवेक के मार्फत किसी निर्णय पर पहुँचे न कि उग्र सम्वेदना तथा रूढ़िवादी-अतिक्रमणकारी विचारधारा के बलबूते। यहाँ अतिक्रमणकारी विचारधारा कहने का ये तात्पर्य है कि कोई भी ऐसी विचारधारा जिसमें से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से सोचने में बाधा पहुँचे, जिसकी गिरफ्त में आप इस कदर आ जायें कि आपकी तर्कशक्ति ही क्षीण पड़ने लगे।