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Ambar25 Jan, 2017

फिल्म 'काबिल' में रह गई ये 8 बड़ी गलतियां, फिर भी है काबिले-तारीफ 

क्या आपका ध्यान इन गलतियों पर गया?

फिल्म 'काबिल' के ट्रेलर को दर्शकों का बहुत अच्छा रिस्पांस मिला था। मैं जिस थिएटर के फर्स्ट शो में फिल्म 'काबिल' देखने गया वह थिएटर लगभग 40% ही भरा हुआ था। हो सकता है ऐसा फिल्म 'रईस' से टकराव की वजह से हुआ हो। 

फिल्म काफी मेहनत और नेक इरादों के साथ बनाई गई है। इसलिए दर्शक फिल्म के पहले सीन से ही फिल्म से जुड़ाव महसूस कर पा रहे थे। रोहन भटनाकर (ऋतिक रोशन) और सुप्रिया (यामी गौतम) के किरदारों में दोनों सितारे इतने रमे हुए दिखाई दे रहे थे, कि किसी भी लिहाज़ से नहीं लग रहा था कि दोनों एक्टिंग कर रहे हैं। दोनों के हंसी-ख़ुशी के पल दिल को सुकून देते हैं। एक सीन में यामी और ऋतिक थोड़ी देर के लिए मॉल में खो जाते हैं, जिसे देखकर दर्शकों के मन में भी बेचैनी सी होने लगती है। 

कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब रोहन भटनाकर और सुप्रिया की ज़िन्दगी में विलेन (अमित) रोहित रॉय और माधवराव शेलार (रॉनित रॉय) की एंट्री होती है। अमित की एक घटिया हरकत से रोहन और सुप्रिया की ज़िन्दगी तहस-नहस हो जाती है। सारा सिस्टम कॉर्पोरेटर माधवराव शेलार की जेब में होता है, जिसकी वजह से पुलिस भी रोहन की कोई मदद नहीं करती। मजबूरन रोहन अपनी लड़ाई खुद लड़ने की ठान लेता है। इसी के साथ फिल्म में इंटरवल हो जाता है, और दर्शक सोचते रह जाते हैं कि नेत्रहीन रोहन अपना बदला कैसे ले पाएगा। 

इंटरवल के बाद फिल्म इस तरह रफ़्तार पकड़ती है कि आप अपनी पलकें भी नहीं झुका पाएंगे। रोहन का बदला किसी भी तरह से ऐसा नहीं लगता कि इसमें लॉजिक मौजूद नहीं है। हीरो और विलेन के चूहे बिल्ली के खेल में दर्शक अपनी सीटी और ताली बजाने से खुद को नहीं रोक पा रहे थे। रोहन अपना बदला ले पाते हैं या नहीं, यह जानने के लिए आपको सिनेमाघर की ओर रुख करना पड़ेगा। 

कहा जाता है न कि 'दुनिया में भगवान के अलावा कुछ भी परफेक्ट नहीं होता' इसी तरह फिल्म 'काबिल' के काबिले-तारीफ होने के बावजूद इसमें कुछ गलतियां रह गई हैं।