1998 वर्ल्ड कप का स्टार क्रिकेटर आज भैंस चराने को मजबूर

दृष्टिबाधित क्रिकेट वर्ल्ड कप में किया था प्रतिनिधित्व।

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विश्वकप में देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी क्रिकेटर के लिए एक सपने जैसा होता है। ऐसा ही एक सपना गुजरात से ताल्लुक रखने वाले भालाजी डामोर ने जिया था। भालाजी डामोर ने सन् 1998 के विश्वकप में एक ऑलराउंडर के रूप में न केवल देश का प्रतिनिधित्व किया बल्कि इस टूर्नामेंट के हीरो भी रहे। बेशक यह वर्ल्ड कप दृष्टिबाधित खिलाड़ियों का था। लेकिन इस खिलाड़ी की बदौलत ही इंडियन टीम सेमीफाइनल तक पहुँची थी।

एक मामूली से किसान परिवार से संबंध रखने वाले इस दृष्टिबाधित क्रिकेटर को उम्मीद थी कि विश्वकप के बाद उसकी ज़िन्दगी कुछ बेहतर हो जाएगी। लेकिन आज 18 साल बाद भी ये प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी जीविका के लिए भैंस चराने और खेती के छोटे-मोटे कामों पर निर्भर है। आखिर हमारे देश में खिलाड़ियों के साथ ऐसा क्यों होता है? 

आइये ऐसे ही एक जांबाज खिलाड़ी की स्टोरी जानते हैं।

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