इसलिए मनाया जाता है भाई दूज, भगवान सूर्य की संतानों से जुड़ी है पौराणिक कथा

हिन्दू धर्म में है इस त्यौहार का खास महत्व। 

भाई दूज, भाई-बहन के रिश्ते को प्यार की डोर से मजबूत करने वाले त्यौहारों में से एक माना गया है। हिन्दू धर्म का ये पवित्र त्यौहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इसे भैया दूज या यमद्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सभी बहनें निराहार रहकर अपने भाई को रोली चंदन का टीका लगाकर उनके उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की मनोकामना करती हैं।

दिवाली के दो दिन बाद आने वाले इस त्यौहार पर यदि बहन अपने हाथ से भाई को खाने का निवाला खिलाए तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस त्यौहार पर बहन के घर भोजन करने का भी विशेष महत्व है। बहन चचेरी अथवा ममेरी भी हो सकती है। बहन न होने पर गाय या नदी के समीप बैठ कर भोजन करना भी शुभ माना जाता है।

वैसे भाई दूज मनाने के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कथा है। आइये इस कथा को विस्तार से जानते हैं।