दीपावली के दिन श्रीराम अयोध्या पहुंचे थे तो माँ लक्ष्मी को क्यों पूजा जाता है? जानें पौराणिक वजह 

आपको भी नहीं मालूम न?

दिवाली एक धार्मिक, विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश और खुशी का, अंधकार हटाने का त्यौहार है। जिसे पूरे भारत के साथ-साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है। दिवाली सम्पूर्ण विश्व में मुख्यतः हिन्दूओं और जैनियों द्वारा मनाई जाती है। यह पाँच दिन (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावश्या, कार्तिक सुधा पधमी, यम द्वितीया या भाई दूज) का हिन्दू त्यौहार है जो धनतेरस से शुरु होता है और भाई दूज पर खत्म होता है। 

ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा हमें अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाएगी और इससे हमें अच्छे कार्यों को करने के लिये शक्ति मिलेगी। साथ ही इस दिन घर के चारों ओर दीये और मोमबत्ती जलाकर कोने-कोने को रोशनी से जगमगाने की भी परंपरा है। इस दिन व्यापारी अपने पूरे साल के खर्च और लाभ जानने के लिए अपने बहीखातों की जाँच करते हैं।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार दिवाली अश्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की 13वें चंद्र दिन पर मनाया जाता है जो परम्परागत रुप से हर साल अक्टूबर या नवम्बर में दशहरा के 21 दिन बाद मनाया आता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, दिवाली का त्यौहार मनाने के बहुत सारे कारण हैं। आइये जानते हैं आखिर दिवाली मनाई क्यों जाती है। साथ ही हम ये भी जानेंगे कि इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा क्यों की जाती है।