गोवर्धन पूजा या अन्नकूट का त्यौहार, क्या है आखिर इसकी पौराणिक मान्यता?

अन्नकूट के बारे में नहीं जानते होंगे। 

वेदों के अनुसार इस दिन इन्द्र, वरुण, अग्नि आदि देवताओं की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। साथ में गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती भी की जाती है। ब्रजवासियों का तो यह मुख्य त्यौहार है। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई, उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाए जाने की परंपरा थी। पकवान तथा मिठाइयों की मात्रा इतनी अधिक होती थी कि उनका पूरा पहाड़ ही बन जाए। इस पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है जिसमें सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है इसमें पूरा परिवार और वंश एक जगह बनाई गई रसोई से भोजन करते हैं। भोजन में कढ़ी, साबुत मूंग, बाजरा, चावल, चूड़ा तथा सभी सब्जियां एक जगह मिलाकर बनाई जाती हैं। मंदिरों में भी अन्नकूट बनाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

आइये इस पूजा को मनाने के पीछे की वजह को विस्तार में जानते हैं।