विश्व-युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा को 58 साल बाद मिली बकाया पेंशन

लम्बे वक्त तक किया संघर्ष। 

‘मराठा लाइट इन्फैन्ट्री’ के लांस नायक जोति धोंडी यादव, बहुत ही कम उम्र में अपने देश के लिए कुर्बान हो गए थे। 6 जनवरी 1945 को वेस्टर्न फ्रंट (अफ्रीका) में, धोंडी मात्र 23 साल की उम्र में मारे गए थे। तब से अभी तक उनकी पत्नी काशीबाई अपने हक की जंग लड़ रही थी।

लंबे इंतज़ार और संघर्ष के बाद अब जाकर काशीबाई को उनकी बकाया पेंशन मिली है। आइए आपको बताते हैं काशीबाई की पूरी कहानी के बारे में।